Wednesday, May 12, 2021
Home उत्तर प्रदेश रोटी कपडा़ और मकान के लिए आसमा को निहारते प्रवासी मजदूर

रोटी कपडा़ और मकान के लिए आसमा को निहारते प्रवासी मजदूर

रिपोर्ट- रवीन्द्र त्रिपाठी

फतेहपुर। कोविड-19 के बाद घरों को लौटे प्रवासी श्रमिकों के सामने अब रोजी रोटी कपडा़ और मकान की समस्या खड़ी हो रही है. आसमा को निहारते गांव स्तर पर श्रमिकों को काम दिलाने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में मजदूरों को पर्याप्त काम नहीं मिल पा रहा है. जिले के 13 विकास खंडों की 840 ग्राम पंचायतों में 291472 जॉब कार्डधारी मजदूर हैं। इनमें 40458 जॉब कार्डधारी प्रवासी मजदूर हैं लेकिन अभी 40 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जिनमें मनरेगा के तहत काम ही शुरू नहीं किया गया. 23228 मजदूरों को ही मनरेगा के तहत काम मिल सका है अभी भी 17230 मनरेगा में दर्ज प्रवासी श्रमिकों को काम की तलाश है।हलांकि जिलाधिकारी संजीव सिंह ने मनरेगा के तहत हर ग्राम पंचायत पर काम शुरु करा प्रवासियों को हर हाल में काम देने के निर्देश दे रखे हैं. लेकिन बड़ी तादाद में प्रवासी श्रमिक अभी भी काम से दूर है जिसके चलते उन्हें दो वक्त की रोटी के लाले पड़ रहे हैं। काम की तलाश में कई मजदूरों को शहर व कस्बों की ओर रुख करना पड़ रहा है.

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