Sunday, December 5, 2021
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आखिर हत्या में शामिल युवकों का किसने बढ़ाया मनोबल, जुआडखाने को किसका था संरक्षण

रिपोर्ट- रवीन्द्र त्रिपाठी

फतेहपुर। बीते सप्ताह कस्बा बकेवर में हुए डबल मर्डर केस में पुलिस की भूमिका क्षेत्र में चर्चा का विषय है. लम्बे अरसे से चल रहे जुआडखाने को कौन संरक्षण दे रहा था. घटना को दूसरा मोड़ क्यों दिया गया. घटना में मृत ऋषि उर्फ भरोसे के शव को बिना पोस्टमार्टम कराए अंतिम संस्कार करने की पुलिस ने क्यों इजाजत दी? मृतक भरोसे के चाचा जोगिंदर को घटना की सुबह पकड़ने के बाद किस मंशा से फरार कराया और मामला तूल पकड़ने के एक दिन बाद गिरफ्तार किया गया. ये ऐसे सवाल हैं जो किसी के गले नही उतर रहे हैं. पुलिस का कहना कि जोगेंदर नशे की हालत में था इसलिए छोड़ दिया गया था खुद में एक सवाल है. ऋषि उर्फ भरोसे को इस घटनाक्रम से अलग करके फर्जी दौरा आने जीना से गिर जाने की कहानी गढ़ने के पीछे पुलिस का क्या मकसद था? घटना से अलग करके बिना विधिक प्रक्रिया पूरी किए आनन-फानन अंतिम संस्कार करा देना स्वयं में एक कहानी है. थाने में इस घटनाक्रम को लेकर थाना में हो से ही चहल-कदमी कौन से लोग कर रहे थे? आदि आदि सवाल बकेवर पुलिस को संदेह की परिधि में लाते हैं जिसकी अन्य एजेंसी से कराए जाने की जरूरत है. एक सवाल यह भी है कि मृतक अशोक के भाई द्वारा दी गई तहरीर को पुलिस द्वारा क्यों बदलाया गया अभियुक्तों की संख्या कम क्यों कराई गई भी बकेवर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान हैं। आखिर तीसरे नामजद का नाम किसने कम कराया. अपराधिक प्रवृत्ति व नशेबाज ऋषि उर्फ भरोसे को बकेवर पुलिस द्वारा दो साल पूर्व हर्षित उर्फ कल्लू अपहरण कांड में शाकाहारी नशा न करने वाला बताकर आला अधिकारियों वह मुख्यमंत्री कार्यालय को गुमराह किया गया. अगर उस अपहरण काण्ड में इमानदारी से कार्य वाही लाजमी नहीं थी. बकेवर पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहे हैं और क्षेत्रीय लोगों में चर्चा का विषय बन गए हैं.

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