Wednesday, May 12, 2021
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फतेहपुर : एडीओ का फर्जीवाड़ा मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह में आठ जोड़ें जांच में पाए गए अपात्र

रिपोर्ट- रवीन्द्र त्रिपाठी

फतेहपुर। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में शासन के मिले लक्ष्यों को पूरा करने की आपाधापी में जिले में जिम्मेदारों द्वारा बड़े पैमाने पर मनमानी की शिकायतें आती रही हैं. इन शिकायतों में सही ढंग से जांच ना होने के चलते मामले प्रकाश में नहीं आ सके लेकिन हाल ही में तेलियानी विकास खंड के श्री बांकेबिहारी मंदिर में 9 दिसंबर को आयोजित हुए सामूहिक विवाह में सहायक विकास अधिकारी समाज कल्याण द्वारा जिन 13 बेटियों की शादी सामूहिक विवाह में कराई तथा उनके खाते में धन हस्तांतरित किए जाने का पत्र खंड विकास अधिकारी को सौंपा उनकी जांच हुई तो पता चला कि जिन 13 बेटियों का सामूहिक विवाह में विवाह संपन्न कराया गया है उनमें 6 की शादी पहले ही हो चुकी है और 2 अन्य के पते ही फर्जी पाए गए। जो पता इनके द्वारा दर्ज कराए गए थे उनमें वह ढूढें ही नहीं मिलीं. मामला गंभीर देख बीडीओ ने धनराशि हस्तांतरण पर रोक लगा दी और सहायक विकास अधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह के विरुद्ध कार्रवाई किए जाने का पत्र उच्चाधिकारियों को दिया लेकिन कार्रवाई के बजाय वह देवमई विकासखंड में काम कर रहा है. इतना ही नहीं सहायक विकास अधिकारी पर शादी कराने वाली संस्था के सचिव से काम देने के बदले धन की भी मांग की गई थी. लाभार्थियों को भी अनुचित लाभ दिलाए जाने के बदले उसके द्वारा सौदेबाजी की गई।इतना बड़ा मामला होने के बावजूद उच्चाधिकारी अब तक भ्रष्टाचारी पर ठोस कार्रवाई नहीं कर सके हैं. फतेहपुर जिले में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के लागू होने के बाद से अब तक 1452 जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न कराया जा चुका है. इनमें 2017-18 में पहला कार्यक्रम कराया गया।जिसमें 201का 2018-19 में 431 का, 2019-20 में 513का,2020-21 में 307 जोड़ों का पाणिग्रहण संस्कार संपन्न कराया गया. इसके तहत पहले ₹31 हजार और बाद में ₹51 हजार की सहायता राशि प्रदेश सरकार द्वारा लाभार्थियों को विभिन्न मदों में दी जाती रही. इसी में कार्यक्रम के आयोजन कराने की धनराशि शामिल रही है. मजेदार बात यह है कि सामूहिक विवाह कार्यक्रम के आयोजन को लेकर अधिकारी कर्मचारी सदा से ही परेशानी झेलते आए हैं. शुरुआती दौर में बमुश्किल से मिलने वाले जोड़ों पर भी सवालिया निशान लगते रहे हैं. कभी गलत तरीके से विधवां की शादी की बात उठी तो कभी पहले शादी हो जाने की बात सामने आई. सामूहिक विवाह में शादी करने के बाद भी कई मामले सामने ऐसे आए जिनमें पूरे शानो शौकत से सामूहिक विवाह में शादी कर चुके जोडों ने फिर से शादी की. होने वाली इन शिकायतों पर जिम्मेदारों ने कभी गौर ही नहीं फरमाया. नतीजतन मनमानी जारी रही जोडों को ढूंढ कर लाने वाले कई कर्मचारी लाभार्थियों से सौदेबाजी कर गुल खिलाते रहे. गत दो माह पहले प्रकाश में आए एक मामले ने लगे इन आरोपों की पुष्टि कर दी है. तेलियानी विकास खंड का सामूहिक विवाह का कार्यक्रम श्री बांकेबिहारी मंदिर में गत 9 दिसंबर को आयोजित हुआ. सहायक विकास अधिकारी समाज कल्याण ज्ञानेंद्र सिंह ने जिन 13 बेटियों के विवाह की सूची खंड विकास अधिकारी को सौंपी उनमें 8 फर्जी पाई गईं. सहायक विकास अधिकारी ने जो नाम दिए उनमें ममता निवासी कोराईं सही पाई गईं, मनीषा रामपुर पचभिटा जिनकी शादी हो चुकी थी. किरण कसेरूआ की शादी 30 नवंबर को पहले ही हो चुकी थी, हेमपुष्पा निवासी भग्गा का पुरवा की जांच के दौरान पते पर लाभार्थी का कहीं अता पता ही नहीं चला. प्रतिमा माधवपुर पात्रता सूची में आईं तो नेहा व रेशमा अस्ता कबीरपुर की शादी जून महीने में ही हो जाने की बात सामने आई. आदमपुर की सलोनी जांच में पात्र मिलीं, बिलंदपुर की कोमल की शादी 20 फरवरी को हो चुकी थी तथा भदबा निवासी जयललिता की शादी 30 नवंबर को पहले ही हो चुकी थी. कासिमपुर निवासी सुशीला देवी संबंधित पते पर ढूंढे ही नहीं मिली. सुधवां की सीमा व उमरापुर की प्रीति देवी जांच के दौरान पात्र पाई गईं. इतना ही नहीं कार्यक्रम के आयोजन से पहले विवाह कराने की नामित संस्था के विनय श्रीवास्तव से काम देने के बदले सहायक विकास अधिकारी द्वारा धन की मांग की गई. जिसके चलते संस्था ने काम कराने से ही मना कर दिया. ऐन मौके पर संस्था के हाथ खड़े कर देने से भी कार्यक्रम को संपन्न कराने में जिम्मेदारों को पसीने छूट गए. आनन-फानन सामूहिक विवाह का कार्यक्रम तो संपन्न हुआ लेकिन जब खंड विकास अधिकारी तेलियानी प्रतिमा वर्मा ने सहायक विकास अधिकारी द्वारा 28 दिसंबर को लाभार्थियों के खाते में धन हस्तांतरित करने का पत्र दिया तो लाभार्थियों की उन्होंने जांच करा दी. जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया. जिसके चलते खंड विकास अधिकारी ने पात्र लाभार्थियों के खाते में धनराशि ही नहीं भेजी. इतना बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद बीडीओ द्वारा उच्चाधिकारियों को सहायक विकास अधिकारी की करतूतों का एक साक्ष्य सहित काला चिट्ठा भेजा गया. जिसमें लाभार्थियों से भी सरकार से मिलने वाली धनराशि दिलाए जाने के बदले सौदेबाजी किया जाना भी शामिल था. कागजी कार्रवाई अधिकारियों ने क्या किया यह तो वे ही जाने. लेकिन बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा करने वाला सहायक विकास अधिकारी समाज कल्याण ज्ञानेंद्र सिंह फिलहाल देवमई विकास खंड का काम देख रहा है. मिले फर्जीवाड़े के बाद सामूहिक विवाह के हो रहे आयोजनों पर सवाल लगना लाजमी है. पूर्व में मिली शिकायतों पर मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह के लाभार्थियों की हकीकत बयां करने के लिए काफी है. सही मायने में अगर अब तक हुए विवाहों की जांच करा ली जाए तो बड़ा फर्जीवाड़ा खुलकर सामने आ जाएगा.

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