कानपुर : हिंदी दिवस पर कवि व लेखकों को किया गया सम्मानित

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कानपुर। डॉ. शिवमंगल सिंह सुमन हिंदी भवन में निराला शिक्षा निधि एवं भारती परिषद उन्नाव के संयुक्त तत्वावधान में 14 सितंबर को हिंदी दिवस का आयोजन किया गया. जनपद उन्नाव के विशिष्ट विद्वानों कवियों लेखकों के मध्य यह कार्यक्रम संपन्न हुआ. कार्यक्रम की अध्यक्षता विशंभर दयाल त्रिपाठी स्मारक समिति के अध्यक्ष बोध शंकर दीक्षित ने की. कार्यक्रम का संचालन बछरावां डिग्री कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. रामनरेश ने किया. कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार रमाशंकर शुक्ल एवं राजेंद्र सिंह मंच पर उपस्थित रहे. सर्वप्रथम डॉ. शिवमंगल सिंह सुमन के चित्र एवं पंडित कमला शंकर अवस्थी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर हिंदी सेवियो ने शीष झुकाया तत्पश्चात आयोजन में हिंदी सेवी पंडित कमला शंकर अवस्थी स्मृति सम्मान वरिष्ठ पत्रकार राजेश शुक्ला को दिया गया, साथ ही वरिष्ठ पत्रकार एवं पूर्व शिक्षक शत्रुघ्न सिंह को भी सम्मानित किया गया. उक्त अवसर पर निराला शिक्षा निधि के प्रबंधक सचिव नीरज अवस्थी ने आगत अतिथियों का स्वागत किया एवं पिता पंडित कमला शंकर अवस्थी की इस परंपरा को प्रतिवर्ष कराए जाने हेतु सभी लोगों को आश्वस्त किया. इसके उपरांत वरिष्ठ कवि दिनेश प्रिय मन ने हिंदी के वर्तमान परिवेश के गिरते स्तर को किस तरह से संभाला जाए. इस पर बल दिया वरिष्ठ कवि व शिक्षक नसीर अहमद साहब ने इस कार्यक्रम में बुलाने हेतु आभार व्यक्त किया एवं हिंदी के प्रति अपने विनम्र भाव को प्रेषित किया निराला शिक्षा निधि के सदस्य शैलजा शरण शुक्ला इस अवसर पर अपने उद्गार व्यक्त करते हुए प्रतिवर्ष इस परंपरा को जीवंत और अच्छे ढंग से मनाए जाने हेतु संकल्प लिया, साथ ही कवि अतुल मिश्र ने अपने उद्बबोधन में हिंदी को किस तरह से हम अपना सकते हैं. इस प्रयास पर बल दिया इसके उपरांत पंडित हृदय नारायण दीक्षित के सुपुत्र अरुण दीक्षित ने गांव के परिवेश में हिंदी को समावेशित करने की आवश्यकता पर बल दिया.

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कानपुर : हिंदी दिवस पर कवि व लेखकों को किया गया सम्मानित

तत्पश्चात सम्मानित राजेश शुक्ल ने आयोजकों को आभार व्यक्त किया. उन्होंने इस सम्मान हेतु उनका चयन किया उसके उपरांत सन 1969 के संस्मरण सुना कर चार चांद लगाते हुए वरिष्ठ पत्रकार रमाशंकर शुक्ल ने अपना उद्बोधन प्रेषित किया तत्पश्चात राजेंद्र सिंह ने किस तरह से सरकारी सेवाओं में हिंदी कामकाज का उन्होंने दृढ़ संकल्प लिया और उसको अपनी 32 वर्ष की सेवा के दरमियान किस तरह से निभाया. उसके जीवंत संस्मरण प्रस्तुत किया. उसके उपरांत नीरज अवस्थी के आग्रह पर संचालन कर रहे डॉक्टर रामनरेश ने स्वरचित कविता वाचन से समा बांधा एवं अंत में अध्यक्षता कर रहे बोध शंकर दीक्षित ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में सभी विषयों को छूते हुए हिंदी दिवस मनाने की आवश्यकता पर हम सबको सोचने पर विवश करते हुए अपना उद्बोधन दिया. इस अवसर पर वरिष्ठ अधिवक्ता बजरंग सिंह चंदेल पत्रकार मनीष पांडे कमला शंकर अवस्थी जी के अनन्य सहयोगी मन्नालाल त्रिपाठी अधिवक्ता कमलेश शुक्ला यशवंत सिंह एडवोकेट जिला क्रिकेट संघ के महामंत्री पीके मिश्रा पंडित मुरली प्रसाद स्मारक समिति के संस्थापक विनोद कृष्ण राजा बाबू एवं युवा कवयित्री श्रेष्ठा त्रिपाठी व संजय त्रिपाठी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे. सभी आगंतुकों ने सफल कार्यक्रम की भूरी-भूरी प्रशंसा की एवं अंत में रात्रि भोज उपरांत यह कार्यक्रम समाप्त किया गया.

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