नई दिल्ली भारत में प्राचीन काल से दीवाली को हिंदू कैलेंडर के कार्तिक माह में गर्मी की फसल के बाद के एक त्योहार के रूप में दर्शाया गया. पद्मपुराण और स्कन्द पुराण में दीवाली का उल्लेख मिलता है माना जाता है कि ये ग्रन्थ पहली शताब्दी के दूसरे भाग में किन्हीं केंद्रीय पाठ को विस्तृत कर लिखे गए थे. दीये (दीपक) को स्कन्द पुराण में सूर्य के हिस्सों का प्रतिनिधित्व करने वाला माना गया है, सूर्य जो जीवन के लिए प्रकाश और ऊर्जा का लौकिक दाता है और जो हिन्दू कैलंडर अनुसार कार्तिक माह में अपनी स्तिथि बदलता है. कुछ क्षेत्रों में हिन्दू दीवाली को यम और नचिकेता की कथा के साथ भी जोड़ते हैं.

नचिकेता की कथा जो सही बनाम गलत, ज्ञान बनाम अज्ञान, सच्चा धन बनाम क्षणिक धन आदि के बारे में बताती है पहली शताब्दी ईसा पूर्व उपनिषद में लिखित है. दिवाली का इतिहास रामायण से भी जुड़ा हुआ है. ऐसा माना जाता है कि श्री राम चन्द्र जी ने माता सीता को रावण की कैद से छुटवाया था. तथा फिर माता सीता की अग्नि परीक्षा लेकर 14 वर्ष का वनवास व्यतीत कर अयोध्या वापस लोटे थे. जिसके उपलक्ष्य में अयोध्या वासियों ने दीप जलाए थे तभी से दीपावली का त्यौहार मनाया जाता है. लेकिन आपको यह जानकर बहुत हैरानी होगी की अयोध्या में केवल 2 वर्ष ही दिवाली मनायी गई थी.

9वीं शताब्दी के संस्कृत नाटक नागनंद में राजा हर्ष ने इसे दीपप्रतिपादुत्सवः कहा है जिसमें दीये जलाये जाते थे और नव वर-बधू को उपहार दिए जाते थे. 9वीं शताब्दी में राजशेखर ने काव्यमीमांसा में इसे दीपमालिका कहा है जिसमें घरों की पुताई की जाती थी और तेल के दीयों से रात में घरों, सड़कों और बाजारों सजाया जाता था. फारसी यात्री और इतिहासकार अल बेरुनी ने भारत पर अपने 11वीं सदी के संस्मरण में दीवाली को कार्तिक महीने में नये चंद्रमा के दिन पर हिंदुओं द्वारा मनाया जाने वाला त्यौहार कहा है. पुलिस के इंटेलिजेंस ब्रांच में कार्यरत चन्द्रकान्त बिस्वाल जी के साथ संवाददाता लवकुश आर्या के प्रयाशों से मो लेखा मो दुनिया ग्रुप के परिचालक खुशि राम साहू एवम नीति शिक्षा परिवार ग्रुप के परिचालक दुर्गाशंकर दे के मिलित उद्यम से सोशल मीडिया द्यारा एक कवि सम्मिलनी आयोजित किया गया. जिसमें पांच सौ कवियों ने ऑनलाइन प्रतिभाग में शामिल हुए प्रसंग दीपावली के ऊपर कविता प्रस्तुत किया गया. जज भारती रथ मैडम द्यारा उन कविताओं के शीर्ष सौ कवि। दिलीप कुमार नंदी (जाजपुर), जयकुमार मिश्र (गजपति), सागरिका साहू (जाजपुर), अजित कुमार त्रिपाठी (गंजाम), स्वर्ण रेखा पंडा (नुआपड़ा), बिजय कुमार स्वाईं (कटक), निशीथ चक्रवर्ती (केन्द्रा पड़ा), जग मोहन प्रधान (जाजपुर), संतोषिनी नायक (सुबर्ण पुर), संबितदास (जगतसिंह पुर), चुमुकी दास (बलांगीर), सहदेव बेहेरा (केंदुझर), गजेंद्र कुमार सेठी (केंदुझार), बल्लव साहू (जाजपुर), प्रणति महापात्र (बालेस्वर), संतोष कुमार अदाबर (सुबर्ण पुर), सुभांसु शेखर पाढी (सुबर्णपुर), जयंती नन्द (सुबर्णपुर), प्रकाश सामल (जगतसिंहपुर), चन्दन सोनी (बरगढ़), दिप्ति देबदर्शनी सुतार (केंदुझर), ज्योस्ना रानी देवी (गजाम), अमूल्य कुमार दास (गंजाम), सारंग घर साहू (ढेंकानाल), सुषमा त्रिपाठी (गंजाम), गगन दास (गजपति), जुजिस्टर मुदुली (कलाहांडी), भागीरथी सागर (कलाहांडी), पबित्र बिस्वाल (पूरी), सुभम बेहेरा (कटक), ममता बारीक (जाजपुर), जीतूराम साहू (बलांगिर), भबनी शंकर गिरी (मयूरभंज), अर्पिता दास (जाजपुर) राजलष्मी बारीक (कटक), रबिन्द्र बेहेरा (कटक), आर्त त्राण खुंटिया (सोनपुर), निरंजन साहू (ढेंकानाल), बेद ब्यास मैहर (बरगढ़), सर्बेस्वर साहू (भद्रक), सनातन महाकुड़ (नयागढ़), साधना पंडा (भुबनेस्वर), बेद ब्यास मेहेर (बरगढ़), सर्बेस्वर साहू (भद्रक), बांके बिहारी महाकुड़ (सुबर्णपुर), अशोक पति (ढेंकानाल), पिंकू रण बीड़ा (संबलपुर), तरुण सेन मैहर (बरगढ़), मिथुन नायक (अनुगुल), सुभस्मिता मोहन्ती (पूरी), ताप्तिमई पंडा मिश्र (बरगढ़), रुद्रनारायण साहू (कटक), पपु परिडा (गंजाम), दीप्तिमई नन्द (बलांगीर), तेजस्वनी सामल (केन्द्रा पड़ा), संकर्षण त्रिपाठी (गंजाम), लग्ना सुमन दे (पूरी), इं.प्रकाश माझी (देबगढ़), आशुतोष ठाकुर (बलांगीर), सरोज साहू (झारसुगुड़ा), जगदीश सतपथी (जाजपुर), राकेश दास(कोरापुट), हरिहर भुक्ता (अनुगुल), चित्त रंजन दास (गंजाम), अबनी कान्त साहू (बरगढ़), क्षेत्रबासी बेहेरा (गंजाम), महेस्वता नाथ (जाजपुर), योगेस्वर गहिर (कलाहांडी), कल्पना राय (संबलपुर), जन्मेजय नायक (पूरी), प्रेमलता साहू(कटक), अरुण महापात्र (तेलेंगाना), सुमंत बेहेरा (गंजाम), अनाम चरण साहू (पूरी), रिपुन जय महापात्र (जाजपुर), निहारिका पंडा (नयागढ़), सुभाष चंद्र साहू (रायगड़ा), सुभ्रासु भूषण मेहेर (बलांगीर), सुषमा मंजरी दास (बरगढ़), बैजन्तमाला राउत (कटक), रीता अपराजीता मोहन्ती (भुबनेस्वर), राम चंद्र मोहन्ती (गजाम), जीतेन्द्र साहू (बरगढ़), हिमांचल साहू (कलाहांडी), हेमंत पल्लई (केदुझर), शिब प्रसाद हाती (बरगढ़), सोभंगिनी नन्द (कोरापुट), राजकिशोर मुंडी (कटक), प्रकाश बरिहा (बरगढ़), कल्पना राउत (कटक), मनस्विनी मुश्र(केंन्द्रापड़ा), राकेश माहाणा (खोर्दा), साबिता सुक्ला (नयागढ़), संतोष साहू (नयागढ़), कौस्तुव जाल(बलांगीर), बर्षा रानी बल (जाजपुर), झिली कुमारी साहू (गंजाम), समर बल्लव भोई(बालेस्वर), अजय मल्लिक (जयपुर), प्रशांत कुमार साहू (ढेंकानाल), अनादि सेठ (बलांगिरी), भाब ग्राही त्रिपाठी (मलकानगिरी), राजेंद्र बिसोई (गंजाम) ग्रुप के तरफ से मुख्य अतिथि भबानी शंकर निआल, कलाहांडी महोदय द्वारा सम्मानित किया गया तथा ग्रुप परिचालक खुशि राम साहू भवानी पटना कालाहांडी ओडिशा द्वारा मुख्य अतिथि भबानी शंकर निआल, कलाहांडी को सम्मान स्वरुप स्मृति चिन्ह एवं मानपत्र प्रदान किया गया.

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