Wednesday, May 12, 2021
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कविता : सुगन्ध

तुम दूर रहो या पास पिया,
तेरी ही महक समाई है.
तुमसे ही लेके सुगन्ध पिया,
सगरी दुनिया महकाई है.
तुम दूर रहो या पास पिया,
तेरी ही महक समाई है.
तस्वीर तेरी अपलक लेकर,
काजल सी लकीर लगाई है.
तेरा नाम पिया लेकर के ही,
हर प्रीति की रीति निभाई है.
तुम दूर रहो या पास पिया,
तेरी ही महक समाई है.
बन नाभि निरन्तर भंवर पिया,
त्रिवली बीच भँवर समाई है.
ऋतु प्रीत निबाहन की आई,
यौवन ने ली अंगड़ाई है.
तुमसे ही लेके सुगन्ध पिया,
सगरी दुनिया महकाई है.
तुम दूर रहो या पास पिया,
तेरी ही महक समाई है.

रश्मि पाण्डेय

बिन्दकी, फतेहपुर, उत्तर प्रदेश

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